गांव देहात में रेवड़ रोगप्रतिरोधकता Herd Immunity

जब जनसंख्या का 60-70 फ़ीसदी भाग यह प्रतिरोधकता अपने में विकसित कर लेगा तो रोग का प्रसार रुक जायेगा और वह समाज से गायब हो जायेगा।


हर्ड इम्यूनिटी बहुत सुनने में आ रहा है। बहुत से लोग कह रहे हैं कि कोरोना वायरस का टीका मिलना आसान नहीं है। छ महीने में मिल सकता है, दो साल भी लग सकते हैं। या यह भी हो सकता है कि इस वायरस का कोई टीका मिले ही न! इस लिये रेवड़ रोगप्रतिरोधकता (हर्ड इम्यूनिटी) ही सही तरीका है इस रोग से लड़ने का।

प्रधानमन्त्री-इन-वेटिंग अव्वल तो पप्पू हैं। पर कल उन्होने सही कहा कि लॉकडाउन केवल पॉज़ बटन है। डिलीट बटन नहीं। समस्या बस यही थी कि उनके पास डिलीट बटन का कोई आइडिया नहीं था।

उसका एक आइडिया स्वीडन के पास है। वहां वे अपने देश में वृद्धों को बचाते हुये जवान पीढ़ी को हिलने मिलने दे रहे हैं। इस प्रकार उनकी सोच है कि लोग कोविड19 से जूझें और रेवड़ रोगप्रतिरोधकता (herd immunity) का विकास हो। जब जनसंख्या का 60-70 फ़ीसदी भाग यह प्रतिरोधकता अपने में विकसित कर लेगा तो रोग का प्रसार रुक जायेगा और वह समाज से गायब हो जायेगा। यह सोच अन्य देशों से भिन्न है और इस कारण से स्वीडन की आलोचना भी हो रही है। वहां लोग पास के अन्य नोर्डिक राष्ट्रों की तुलना में ज्यादा मर रहे हैं। पर फिर भी स्वीडन अपनी सोच पर अडिग है और रोग से बचाव के लिये यह जोखिम उठाने को तैयार है।

स्टॉकहोम – स्वीडन में लोग रेस्तरां जा रहे हैं और हिलमिल रहे हैं। Business Insider से लिया चित्र
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