संक्रमण के बढ़ते मामले और व्यक्तिगत लॉकडाउन की जरूरत #गांवकाचिठ्ठा

संक्रमण ग्रस्त होना या न होना – एक पतली सी लाइन से विभक्त होता है। उसमें एक ओर बचाव है, रोचकता है, प्रयोग हैं और सोचने, पढ़ने, लिखने की सम्भावनायें हैं; दूसरी ओर संक्रमण है, रोग है, अस्पताल है, अकेलापन है, परित्यक्त होने का दारुण दुख है और (शायद) मृत्यु भी है।


ट्विटर पर अतिशयोक्ति जी ने पूर्वांचल के कोविड19 मामले द्विगुणित होने के दिनों की गणना के ग्राफ प्रस्तुत किये हैं। इसके अनुसार पूर्वांचल (प्रयाग, भदोही, मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी, प्रतापगढ़, सोनभद्र और आजमगढ़) में कोरोना संक्रमण के मामले लगभग 5-7 दिन में दुगने हो रहे हैं।

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लौटे प्रवसियों की प्राथमिकता कोरोना से बचाव नहीं, रोजगार है #गांवकाचिठ्ठा

यह जो बड़ी संख्या में आबादी आ कर गांव में टिकी है, वह यह नहीं पता कर रही कि यहां अस्पताल कितने हैं; कितने बिस्तर उनमें कोविड19 के लिये हैं; … वे यह जानना चाहते हैं कि रोजगार कब, कहां और कैसे मिलेगा।


मई 23, 2020, विक्रमपुर, भदोही

अखबार में कहीं पढ़ा कि आरएसएस ने कोई आंतरिक सर्वे कराया है जिसमें प्रवासी पलायन कर वापस आये साठ फीसदी मजदूर कहते हैं कि मौका लगने पर वे वापस लौटेंगे, अपने काम पर। मैंने जिससे भी बात की है – वापस लौटने वाले से, वह कोविड समस्या से बड़ी समस्या अपने रोजगार की मानता है। पर, फिलहाल, वापस जाने के लिये अभी लोग दुविधा में हैं।

हरिशंकर से मिला था तो उनका कहना था कि सूरत से आते समय उनके मन में यह पक्की धारणा थी कि वापस नहीं जाना है; यद्यपि उनका 10 हजार का घरेलू सामान वहां रखा हुआ है। ठाकुर साहब, जिनके कमरे में हरिशंकर किराये पर रहते थे, उन्होने अगले दो-चार महीने किराया न लेने की बात कही है। इस दौरान वैसे भी कोई और किरायेदार मिलता भी नहीं।

हरिशंकर, सूरत से वापस लौटे हैं
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यह सतर्क रह कर सामान्य जीवन जीने का समय है #गांवकाचिठ्ठा

कोरोना को लेकर बहुत सी भ्रांतियां डाक्टरों ने, मीडिया ने और राजनेताओं/सेलीब्रिटीज ने फैलाई हैं। वे भ्रांतियां जितनी शहरों में हैं, उतनी गांवों में भी हैं।



गाँव में वैसी दशा नहीं है कि व्यक्ति एक फ्लैट में कैद हो कर रह जाये। मुझे तो सामान्य दिनों की तरह 10-12 किलोमीटर साइकिल चलाने को मिल ही जाता है। बहुत ज्यादा बहिर्मुखी नहीं हूं, तो आपस में आदान प्रदान की जो भी थोड़ी बहुत जरूरते हैं, आसानी से पूरी हो ही जाती हैं। पर घर के बाकी सदस्य शायद वह नहीं कर पा रहे। अपनी पुत्रवधू से बहुत ज्यादा बातचीत नहीं है इस विषय में, पर पत्नीजी को तो देखता हूं, गतिविधियों में परिवर्तन और अवरोध के कारण समस्या हो रही है। कुछ दिन पहले उनका रक्तचाप और धड़कन ज्यादा थी। उनसे रक्तचाप की दवा नियमित लेने को कहा। आज भी लगता है हाइपर टेंशन का उनका प्रबंधन उपयुक्त नहीं है। आज उन्हें डाक्टर को दिखाने की आवश्यकता महसूस हुई। उनकी उम्र 2019 में साठ साल की हो गयी है। रक्तचाप और मधुमेह का उनका प्रबंधन इस समय, जब कोरोना संक्रमण काल में उन्हें किसी भी अन्य व्याधि से मुक्त होना जरूरी है, पूरी तरह दुरुस्त होना चाहिये। इसलिये उन्हें डाक्टर के पास अस्पताल ले कर गया।

सूर्या ट्रॉमा सेण्टर एण्ड हॉस्पीटल की ओपीडी

अस्पताल में सामान्य से कहीं कम मरीज थे। दरबान ने हमारे हाथ सेनिटाइज किये और एक अस्पताल कर्मी ने हमारा थर्मल स्केनिंग किया। डाक्टर साहब पूरी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मेरी पत्नीजी से मिले। दस दिन की दवायें लिखी हैं और उसके बाद आवश्यकतानुसार टेस्ट कराये जायेंगे। एक कस्बाई अस्पताल (सूर्या ट्रॉमा सेण्टर एंड हॉस्पीटल, औराई) में भी इस प्रकार का प्रोटोकॉल – मुझे प्रभावी लगा। कोरोना विषाणु अपनी इतनी इज्जत देख कर वाकई प्रसन्न होगा। या कष्ट में होगा? पता नहीं। अस्पताल का वातावरण उसके प्रसार को रोकने में पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आया।   

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गांव लौटे लोग बिना रोजगार ज्यादा बैठ नहीं पायेंगे #गांवकाचिठ्ठा

अगर उन्हें घर पर रहते हुये एक सम्मानजनक व्यवसाय मिल जाता है, जो प्रवास से भले ही कुछ कम आमदनी दे, तो वे सब यहीं रुक जायेंगे और यह समाज और उत्तर प्रदेश की बड़ी जीत होगी।



गुन्नीलाल पाण्डेय मुझसे आगे साइकिल पर चलते हुये। वे मुझे हरिशंकर पाल से मिलाने ले गये थे।

मई 21, 2020, विक्रमपुर, भदोही

मेरे गांव के सखा गुन्नीलाल पाण्डेय मुझे आज सवेरे हरिशंकर पाल से मिलवाने अगियाबीर की गड़रियों की बस्ती में ले गये। मैं गुन्नी पांड़े के घर सवेरे गया था। वे अपनी साइकिल पर बैठ, मुझे साथ ले कर निकले। गड़रियों के घर अगियाबीर के पश्चिमी किनारे पर हैं। वह मिर्जापुर जिले में है। उनकी बस्ती के बाद एक नाला है और नाले के बाद भदोही जिले का सीमावर्ती गांव आता है द्वारिकापुर। गुन्नीपांड़े ने मुझे हरिशंकर के बारे में पहले बताया था। आज उनसे हरिशंकर से मिलवाने की इच्छा जाहिर की तो पांड़ेजी मिलवाने ले आये।  

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पूर्वांचल में कोरोना प्रसार का प्रारम्भ है यह। #गांवकाचिठ्ठा

न केवल इन जिलों के मामले नित्य बढ़ रहे हैं; वरन अगले दिन बढ़ने की दर पिछले दिन बढ़ने की दर से ज्यादा है। अर्थात, मामले बढ़ने की दर भी बढ़ रही है। यह अलार्म है – स्पष्ट और तेज आवाज का अलार्म।


मई 20, 2020, गांव विक्रमपुर, भदोही।

लोग भारत के कोरोना प्रसार के आंकड़े प्रस्तुत करते हैं। प्रांत के भी आंकड़े देते हैं। महानगरों के आंकड़े भी परोसे जाते हैं। पर उत्तरप्रदेश एक समांग इकाई नहीं है। प्रांत के पूर्वी भाग की प्रकृति और अर्थव्यवस्था अन्य हिस्सों से अलग है। इसलिये, यहां कोरोना संक्रमण का प्रसार भी (सम्भवत: ‌) अलग प्रकार से होगा। मैंने इस धारणा के आधार पर भदोही के आसपास के वे जिले लिये, जिनमें संक्रमण के मामले अपेक्षाकृत अधिक संख्या में हैं। प्रयाग, मिर्जापुर, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और भदोही को चुना। नित्य इनके कुल कोरोना आंकड़े नोट करना प्रारम्भ किया। पिछले तीन दिन के इन जिलों के आंकड़े बताते हैं कि न केवल इन जिलों के मामले नित्य बढ़ रहे हैं; वरन अगले दिन बढ़ने की दर पिछले दिन बढ़ने की दर से ज्यादा है। अर्थात, मामले बढ़ने की दर भी बढ़ रही है। यह अलार्म है – स्पष्ट और तेज आवाज का अलार्म।

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