गाय, सुनील ओझा और गड़ौली धाम


दीर्घजीवन की सेंच्यूरी मारने की इच्छा शायद मेरे शहरी जीवन त्याग कर इस ग्रामीण अंचल में बसने के निर्णय के मूल में है। हो सकता यही चाह सुनील जी को गड़ौली धाम लाई हो। जो हो; इस शतकीय सोच की एक एक गेंद खेलना और लिखना है!

महुआ, हिंगुआ और गड़ौली धाम


हिंगुआ का चित्र लेने के लिये मैं घुटनों के बल जमीन पर बैठता हूं। मोबाइल को गिरने से बचाते हुये कठिनाई से चित्र ले पाता हूं। उम्र बढ़ रही है जीडी।
हिंगुआ का चित्र लेने के लिये झुकना – ज्यादा समय नहीं कर पाओगे!

करुणेश – फोटो खींचने वाले नेता


शैलेश के अनुसार करुणेश में बढ़िया चित्र खींचने के अलावा लोगों को परखने और उनकी खूबियां ढूंढ़ने-उभारने की जबरदस्त प्रतिभा है। वे अपने को पीछे रख कर प्रतिभावान को आगे बढ़ाने-प्रोमोट करने में कंजूसी नहीं करते।

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