पूर्वांचल की ग्रे नैतिकता — एक ऑबिच्युरी से उपजा आत्मसंवाद


एक सज्जन ने मुझे फोन किया। “जीडी, तुमने अमर उजाला देखा? सबसे ऊपर एक छोटे से कस्बा नुमा शहर के आदमी के देहावसान पर पूरे पेज का विज्ञापन है। मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि मडीयाहू जैसे कस्बे के आदमी का दस-पंद्रह लाख खर्च कर कोई ऑबीच्यूरी छपायेगा।” अमर उजाला मेरे घर आताContinue reading “पूर्वांचल की ग्रे नैतिकता — एक ऑबिच्युरी से उपजा आत्मसंवाद”

साक्षी माला – जप करने की ओर


अब, इतनी जिंदगी बीत जाने के बात पता चला कि रुद्राक्ष की 108 जप की माला के साथ एक साक्षी-माला का विधान है। इस माला में 20 मनके होते हैं जो मोटे धागों की लड़ी से गुंथे होते हैं। यह माला खुली होती है – एक लकीर की तरह।

कालभैरव के भगत जीतेंद्र


वे सज्जन बनारस में प्रधानमंत्री जी के आज भी होने की बात कर रहे थे। उनके अनुसार मोदी जब भी आते हैं, तीन दिन रुक जाते हैं। उनके चक्कर में शहर का कामधाम बंद हो जाता है। बाजार के सेठ भी कहते हैं कि बिक्री कम होती है।

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