बनवासी (मुसहरों) का भोजन रखाव


बनवासी (मुसहरों) का भोजन
[…]उनके पास कोई अलमारी-मेज जैसी चीज तो थी नहीं। आसपास के जीव जन्तुओं और कुत्तों से बचाने के लिये लकड़ी के डण्डे जमीन में गाड़ कर उसके दूसरे सिरे पर भोजन की बटुली-बरतन लटका रखे थे उन्होने।[…]

पुस्तक कब पढ़ी मानी जाये?


रिटायरमेण्ट के बाद जब मित्र भी नहीं बचते (शहर के मित्र शहर में छूट गये, गांव के अभी उतने प्रगाढ़ बने नहीं) तो पठन ही मित्र हैं। दिन भर लिखा पढ़ने में बहुत समय जाता है। पर बहुत व्यवस्थित नहीं है पठन। गांव में अखबार वाला समाचारपत्र बड़ी मुश्किल से देता है। पत्रिकायें नहीं मिलतीं।Continue reading “पुस्तक कब पढ़ी मानी जाये?”

महराजगंज के कस्बाई बाजार पर फुटकर सोच


यह पास का कस्बा – महराजगंज कैसे पनपा? कैसे इसका बाजार इस आकार में आया? यहां रहने वाले पहले के लोग कहां गये? बाजार ने कौन से लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। यातायात के साधन बाजार को किस तरह विकसित करते गये? … ये सवाल मेरे मन में आजकल उठ रहे हैं।

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