आउ, आउ; जल्दी आउ!


वह सामान्यत: अपने सब्जी के खेत में काम करता दीखता है गंगाजी के किनारे। मेहनती है। उसी को सबसे पहले काम में लगते देखता हूं। दशमी के दिन वह खेत में काम करने के बजाय पानी में हिल कर खड़ा था। पैण्ट उतार कर, मात्र नेकर और कमीज पहने। नदी की धारा में कुछ नारियल,Continue reading “आउ, आउ; जल्दी आउ!”

फोड़ (हार्ड कोक) के साइकल व्यवसायी


मैं जब भी बोकारो जाता हूं तो मुझे फोड़ (खनन का कोयला जला कर उससे बने फोड़ – हार्ड कोक) को ले कर चलते साइकल वाले बहुत आकर्षित करते हैं। कोयले का अवैध खनन; उसके बाद उसे खुले में जला कर फोड़ बनाना और फोड़ को ले कर बोकारो के पास तक ले कर आनाContinue reading “फोड़ (हार्ड कोक) के साइकल व्यवसायी”

भोंदू


भोंदू अकेला नहीं था। एक समूह था – तीन आदमी और तीन औरतें। चुनार स्टेशन पर सिंगरौली जाने वाली ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे थे। औरतें जमीन पर गठ्ठर लिए बैठी थीं। एक आदमी बांस की पतली डंडी लिए बेंच पर बैठा था। डंडी के ऊपर एक छोटी गुल्ली जैसी डंडी बाँध रखी थी। यानीContinue reading “भोंदू”

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