आई.सी.यू. में गांव की पोखरी


वे जल क्षेत्र जो गांव की आबादी के बीच हैं; उनकी दशा ज्यादा खराब है। उनमें से इस गांव – विक्रमपुर की पोखरी तो आई.सी.यू. में ही है। ज्यादा जीने की उम्मीद नहीं लगती। और आजकल उसे ले कर गांव के स्तर की राजनीति भी खूब हो रही है।

विकास चंद्र पाण्डेय से लिया शीशम का शहद


मैंने सोचा – सच में तमस छोड़ना चाहिये और सात्विक भोजन – शहद जिसमें सम्मिलित हो – अपनाना चाहिये। जीवन शहदमय हो!

पिछला साल प्रसन्नता के लिये कैसा रहा?


खर्चा कम हुआ। भागमभाग नहीं थी जिंदगी में। घर के हर एक मेम्बर में साफसफाई की आदत पड़ी। “मेरा तो मानना है कि हर साल कम से कम दस दिन का लॉकडाउन घोषित होना ही चाहिये।”

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