गांव की शाम


आज सर्दी कुछ कम है। सियारों की हुआँ हुआँ भी कम ही है। रेलवे स्टेशन पर लूप लाइन में खड़ी ट्रेन का डीजल इंजन ऑन है। हर थोड़ी थोड़ी देर में छींकता है। एक ट्रेन तेजी से गुजर जाती है। अब शायद लूप में खड़ी इस मालगाड़ी का नम्बर लगे।

मोबाइल गर्ल्स कूट्टम की तर्ज पर गोली, गिन्नी और गुन्जा


यह एक परिचयात्मक पोस्ट है। आगे हम गिन्नी, गुन्जा और गोली की बातचीत मिसेज वाईपी और नागेश्वर के माध्यम से करेंगे। क्या पता वह करते करते तीन सौ पेज की एक किताब ही बन जाये!

बाजरा और जोन्हरी के खेतों से गुजरते हुये


एक ही दिन में सुबह शाम की गांव की सड़कों की सैर ने मुझे अलग अलग बिम्ब दिखाये। … जब कुछ लिखने की सामग्री टटोलने का मन हो, तो गांव देहात की सड़कों का ही रुख करना चाहिये। मानसिक हलचल वहां मजे से होती है।

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