कहते हैं भारत ऐसा देश है जो एक साथ बीस शतब्दियों में जीता है। उस हिसाब से यह कल्पना की जा सकती है कि एक अच्छी खासी आबादी सतयुग, त्रेता, द्वापर की भी अभी होगी। मिश्रीलाल की तरह अपने सतयुगी नोश्टॉल्जिया में जीती।
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मानसिक हलचल – ब्लॉग लोगो डिजाइन के बहाने कथ्य
मैंने ब्लॉग पर जितना समय ब्लॉग-पोस्ट लेखन में लगाया है; उससे कम ब्लॉग के सौंदर्य और प्रस्तुति की छवि में नहीं लगाया होगा। पंद्रह साल मेंं ब्लॉग से कमाई शून्य है, पर उसके प्रति आसक्ति बहुत है।
पीपल की डालें और इस्लाम बकरीवाला
इस्लाम सवेरे टहनियां कांट कर लाता है और बकरियां पालता है। बकरियों को चराने नहीं ले जाता। पूर्णत: घुमंतू (नट) जाति अपने रेवड़ एक जगह पर रख कर पालती है और अब एक ही स्थान पर रहती भी है – यह जानकारी अलग सी थी।
