व्यास जी और महाकाव्य सृजन


मार्च’5, 2017: सवेरे की साइकलिंग में हम चले जा रहे थे। राजन भाई और मैं। राजन भाई से मैने कह दिया था कि सड़क-सड़क चलेंगे। पगडण्डी पर साइकल चलाने में शरीर का विशिष्ट भाग चरमरा उठता है। पर राजन जी ने बीच में अचानक पगडण्डी पकड़ ली थी और मैं पीछे चले जा रहा था।Continue reading “व्यास जी और महाकाव्य सृजन”

मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस


मानिक सेठ की महराजगंज, जिला भदोही में किराने की दुकान है। नोटबन्दी के बाद उनकी पहली दुकान थी, जहां मैने कैशलेस ट्रांजेक्शन का विकल्प पाया। पच्चीस नवम्बर की शाम थी। नोटबन्दी की हाय हाय का पीक समय। वे पेटीएम के जरीये पेमेण्ट लेने को तैयार थे। मैने अपने मोबाइल से पेमेण्ट करना चाहा पर इण्टरनेटContinue reading “मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस”

श्यामबिहारी, चाय की दुकान पर


कटका स्टेशन पर अरुण की छोटी-सी चाय की गुमटी है। आज वहीं मिले श्यामबिहारी। परिचय देते समय उन्होंने यह नहीं बताया कि वे किसान हैं। सबसे पहले बोले—”बाईस साल बंबई में रहे। मिस्त्री का काम किया।” फिर बताया कि अब दोनों बेटे बंबई में हैं। वही काम करते हैं। अब ठेका लेने लगे हैं। पहलेContinue reading “श्यामबिहारी, चाय की दुकान पर”

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