कव्वे भी पास आने लगे हैं। पहले वे नीम के पेड़ के नीचे अपनी चोंच में खूब सारे रोटी के टुकड़े समेट भाग जाया करते थे। अब वे हमारी कुर्सी के पास नमकीन चुगने लगे हैं। चरखी और मैंना की अपेक्षा वे ज्यादा सतर्क रहते हैं।
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कटका स्टेशन का लेवल क्रॉसिंग
वह लेवल क्रॉसिंग बहुत खराब है, पर उससे भी ज्यादा खराब मैंने देखे हैं। अगर उससे एक दो बार गुजरना होता तो शायद मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। दिक्कत यह है कि मुझे अपनी साइकिल ले कर दिन में दो चार बार उससे गुजरना होता है।
आसन्न मानसून की मानसिक हलचल
मैं तो वेदर चैनल और तापक्रम के चक्कर में पड़ा हूंं, पर किसान अपने काम पर लग गया है। उसको कोई पगार या पेंशन तो मिलती नहीं। उसे तो खरीफ की फसल की तैयारी करनी ही है।
