एक एक दो दो कमरे के घर हैंं; साथ में मड़ई या टप्पर है जिसमें बकरियां, मुर्गियां, गायें भैंसें रहती हैं। ज्यादातर के पास बकरियां हैं। सर्दी से बचाने के लिये उनपर पुराना कपड़ा या टाट का बोरा डाला हुआ है।
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मंहगू
वह मुझे साइकिल सैर के दौरान अक्सर मिलता है। एक दिन उसने मुझे रोक कर कहा – आप डेयरी से पाउच वाला दूध लेते हैं। उसी भाव से मैं भी ताजा दूध दे सकता हूं। मेरा दूध उससे बेहतर ही होगा। आपको घर पर ही दिया करूंगा।
छब्बीस जनवरी की जलेबी खरीद
घर पर हमारे ड्राइवर साहब ने एक बांस की लम्बी डण्डी छील कर तैयार की। उसपर झण्डा लगा कर घर के ऊपर कोने पर सुतली से सीढ़ी के रेलिंग से झण्डा बांध कर फहराया। सब को जलेबी बांटी गयी। देशभक्ति की ड्रिल सम्पन्न हुई।
