गोविंद लॉकडाउन में बम्बई से लौट तीन बीघा मेंं टमाटर उगा रहे हैं


वे लॉकडाउन के समय बंबई से अपने घर वापस लौटे थे। वहां ऑटो चलाते थे। यहां समझ नहीं आया कि क्या किया जाये। फिर यह सब्जी उगाने की सोची।

बाढ़ू का नाम कैसे पड़ा?


बाढ़ू ने बताया कि सन 1948 की बाढ़ में जन्म होने के कारण उनका नाम बाढ़ू पड़ गया और वही नाम चलता चला आ रहा है।

राजेश की गुमटी और गांव के सामाजिक-आर्थिक बदलाव


राजेश में विनम्रता भी है। वह अदब से बात करता है। वह सफल हो सकता है। और मैं चाहता हूं कि वह सफल बने। वह गांव (सवर्णों) के जुआरी-गंजेड़ी और निकम्मे नौजवानों की भीड़ से अलग अपनी जमीन और पहचान बनाये। यह आसान नहीं है। पर यह सम्भव है।

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