शिव जग यादव और अखबार


शिव जग जी भदोही में वाचमैन हैं। साइकिल पच्चीस किमी चला कर शाम को ड्यूटी पर जाते हैं और सवेरे यहां महराजगंज से अखबार लेते वापस लौटते हैं। एक दिन में 50किमी साइकिल चलाना!

मूरत यादव और मिश्री पाल के साथ गपशप


घुमा फिरा कर मुझसे पूछते हैं – कितने लोगों को नौकरी दिया होगा रेल सेवा के दौरान?

बताने पर कि 3-4 को बंगलो पीयून रखा था; वे कहते हैं कि आपसे पहले मिले होते तो जिनगी तर गयी होती! तब भेंड़ी-गाय-भैस थोड़े पालनी पड़ती।

सुकुआर हो गये हैं लोग। कुल्ला करने भी मोटर साइकिल से जाते हैं।


सुकुआर (नाजुक) हो गये हैं लोग। अब मेहनत नहीं करते। अब यह हाल है कि कुल्ला करने (खेत में हगने) भी मोटर साइकिल से जाने लगे हैं। ट्रेक्टर से खेती करते हैं। वह भी आलस से।

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