सूर्यमणि तिवारी – अकेलेपन पर विचार


फोन पर ही सूर्यमणि जी ने कहा था कि बहुत अकेलापन महसूस होता है। यह भी मुझे समझ नहीं आता था। अरबपति व्यक्ति, जो अपने एम्पायर के शीर्ष पर हो, जिसे कर्मचारी, व्यवसाय, समाज और कुटुम्ब के लोग घेरे रहते हों, वह अकेलापन कैसे महसूस कर सकता है?

अपने मन को साधना कितना कठिन है!


सूर्यमणि जी ने कहा – “मेरे गुरुजी कहते हैं कि अपने भौतिक जीवन (बैंक) से एकमुश्त निकासी सम्भव नहीं होती। भौतिक बेंक से एक एक रुपया के हिसाब से निकालो और एक एक रुपया आध्यात्मिक अकाउण्ट में जमा करो।” इस धीमी रफ्तार से व्यक्तित्व का रूपांतरण होगा।

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