सुन्दर नाऊ की जजमानी


मेरी हेयर कटिंग में कोई खास कलात्मकता की जरूरत नहीं। आजकल के नौजवान लोग जो बंगला कट बाल कटाते हैं, वह नहीं चाहिये। उसके लायक सिर पर बाल बचे ही नहीं हैं।

गंगा की बाढ़ के उतरते हुये


पानी उतरा है तो कूड़ा करकट छोड़ गया है फुटप्रिण्ट के रूप में। यह कूड़ा तो गंगाजी में आदमी का ही दिया है। उसको वे वापस कर लौट रही हैं। पर आदमी सीखेगा थोड़े ही। नदी को गंदा करना जारी रखेगा। “गंगे तव दर्शनात मुक्ति:” भी गायेगा और कूड़ा भी उनमें डालेगा।

रविशंकर मिश्र, 62+


मेरे ब्लॉग के पढ़ने वाले (मेरा अनुमान है) नौजवान और 30-50 की उम्र वाले अधिक होंगे। उन्हें सीनियर सिटिजंस के मसलों में शायद बहुत दिलचस्पी न हो; पर जिंदगी के खेल के हाफ टाइम की सीटी कब बज जाती है, वह खिलाड़ी को ध्यान ही नहीं रहता।

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