2418 कि.मी. की कांवर पदयात्रा कर प्रेमसागर सोमनाथ पंहुचे


बाबा विश्वनाथ तो प्रेमसागर के सदा साथ हैं। यह पूरी यात्रा कोई साधारण यात्रा नहीं, उनकी संकल्प सिद्धि का साधन नहीं; अपने में तीर्थ बन गयी है।

रैवतक-गिरनार के बगल से गुजरे प्रेमसागर


प्रेमसागर 7 दिसम्बर को जूनागढ़ पंहुचे। … यहीं बगल में पूर्व की ओर गिरनार या रैवतक पर्वत है। जिसे देवताओं का निवास माना गया है। इस पर्वत का कई बार उल्लेख महाभारत और हरिवंश पुराण में होता है।

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और मुनीबाबा की पूजा


किशोर वय की लड़कियां थीं। वे यह पूजा-अनुष्ठान किस लिये करती होंगी? हर व्यक्ति कोई न कोई ध्येय गंगा स्नान और पूजा से जोड़ता है। उनके सामने क्या ध्येय होगा?

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