वृद्धो याति गृहीत्वा दण्डं, तदपि न मुञ्चत्याशापिण्डम्


आत्मबुद्धि वाला भाव दिन भर में पांच दस मिनट रहता है। वह बढ़े। सोवत जागत आत्मबुद्धि रहे। तब कोई समस्या नहीं। देह की और जीव की दशा जैसी भी हो, क्या फर्क पड़ता है तब। स्थितप्रज्ञ बनना ध्येय होना चाहिये।

स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती पर विकिपेडिया पेज के बहाने


‘माता’ पुस्तक में श्री अरविंद कहते हैं कि धन दैवीय शक्ति है। यह असुरों के द्वारा हथिया ली गयी है। इसे वापस लाना है। ‘धन’ की तरह लेखन और शिक्षण संस्थायें भी दैवीय शक्तियां हैं। ये असुरों के द्वारा हथिया ली गयी हैं। इन्हें वापस लाना चाहिये।

स्वास्थ्य का स्रोत – घर का बगीचा


कण्डाल से एक छोटी प्लास्टिक की बालटी में पानी ले कर वे हर पौधे के पास जाती हैं और उसकी जरूरत अनुसार पानी उनकी जड़ों में उड़ेलती हैं। पानी कण्डाल से लेने, चलने, झुकने आदि में जो व्यायाम है, वह पत्नीजी के स्वास्थ्य को पुष्ट करता है।

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