इग्यारह बज रहे थे। कोहरे का पर्दा हल्के से ठेल कर कानी आंख से सूरज भगवान ताकने लगे थे। वह बूढ़ा मुझे मर्यादी वस्त्रालय के आगे अपनी सगड़ी (साइकिल ठेला) पर बैठा सुरती मलता दिखा। बात करने के मूड़ में मैने पूछा – आजकल तो बिजली का ठेला भी आने लगा है। वह लेने कीContinue reading “सगड़ी वाला बूढ़ा”
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चक्रीय ताल की दिनचर्या
आगे के जीवन के बारे में नजरिया बदला लगता है। पहले जीवन की दीर्घायु के लक्ष धुंधले लगते थे; अब उनमें स्पष्टता आती जा रही है। नकारात्मकता को चिमटी से पकड़ कर बाहर निकालने की इच्छा-शक्ति प्रबल होती जा रही है।
बनियान में छेद
साबुन की बट्टी के ऑप्टिमल खर्च पर भी एक शोध करना है। अभी तीन बनियान नई खरीदी हैं जिनका प्रयोग पोस्ट स्वावलम्बन युग में होगा। उनकी दीर्घजीविता और उनके छेदों के आकार प्रकार पर भी अध्ययन होगा।
