केदारनाथ चौबे, परमार्थ, प्रसन्नता, दीर्घायु और जीवन की दूसरी पारी


उनका जन्म सन बयालीस में हुआ था। चीनी मिल में नौकरी करते थे। रिटायर होने के बाद सन 2004 से नित्य गंगा स्नान करना और कथा कहना उनका भगवान का सुझाया कर्म हो गया है।

Parasnath, regular in Ganga Snan for 25 years


There are many characters like Parasnath. Cool, composed, without much expectations and living Dharmic life in their own way.

महाभारत : कच, संजीवनी और शुक्राचार्य का मदिरा पर कथन


कल उमड़ी भीड़ वाले मदिरा-साधकगण शुक्राचार्य की बात पर ध्यान देंगे या नहीं, कहना कठिन है। धर्मग्रंथों की निषेधाज्ञा को आजकल वर्जनातोड़क “प्रबुद्ध” जनता जूते की नोक पर रख कर चलती है!

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