कोविड19 का सामाजिक अलगाव, गांव और गंगा तट


गांव सामान्य सा दिखता है। पर गमछा मुंह पर बांधे है और सहमा हुआ है। आसपास के इलाके में अभी किसी के बीमार होने या मरने की खबर नहीं है, वह होने पर शायद गांव भी घरों में दुबक जाये।

जोगी बाबा – सिद्धिनाथ मन्दिर का साधू और अनाथ गौवंश को पालनेवाला


पिछले दो साल से इस इलाके में साइकिल से घूम रहा हूं मैं, पर राजकुमारनाथ (जोगी बाबा) जैसा विलक्षण व्यक्ति नहीं पाया मैने।

खुले में शौच


सन 1987 में मैने अपने बाबा का दाह संस्कार किया था। गांव में लगभग दो सप्ताह रहा उनके क्रिया-कर्म सम्पादित करने के लिये। दस दिन तक अछूत था मैं। अपना भोजन नहीं बनाता था। घर में एक बुआ जी बना देती थीं और भोजन की पत्तल मेरी तरफ़ सरका देती थीं। अगर रोटी अतिरिक्त देनीContinue reading “खुले में शौच”

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