देहात महुआ बीनने में लगा है


बच्चे पॉलीथीन की पन्नियां, महिलाये और पुरुष दऊरी या अन्य कोई बर्तन लिये जमीन पर गिरे पीले फूल बीनते दिखते हैं। भीनी भीनी गंध पूरे वातावरण में बसी है। मेरे तो घर में कमरों में भी, जब हवा तेज होती है तो यह गंध घुस आती है। कुछ फूल बीन लाओ तो उसके आसपास गंधContinue reading “देहात महुआ बीनने में लगा है”

एक भाग्यशाली (?!) नौजवान से मुलाकात


(यह मैने बतौर फेसबुक नोट पोस्ट किया हुआ है। ब्लॉग पर इसका परिवर्धित रूप रख रहा हूं। दस्तावेज के लिये।) वाराणसी में मैं सोनू (प्रमेन्द्र) उपाध्याय के रथयात्रा स्थित मेडिकल स्टाक-दफ़्तर में बैठा था। सोनू मेरे बड़े साले साहब (देवेन्द्र नाथ दुबे जी) के दामाद हैं। अत्यन्त विनम्र और सहायता को तत्पर सज्जन। वे मेरेContinue reading “एक भाग्यशाली (?!) नौजवान से मुलाकात”

पलाश, सागौन और मध्यप्रदेश के आदिवासी


मैं प्रवीणचन्द्र दुबे जी से हाइब्रिड यूकलिप्टस और हाइब्रिड सागौन के प्लाण्टेशन के बारे में चर्चा करना चाहता था। प्रवीण जी मेरे सम्बन्धी हैं। उज्जैन सर्किल के मुख्य वन अधिकारी ( Chief Conservator of Forests) हैं। उससे भी अधिक; विद्वान और अत्यन्त सज्जन व्यक्ति हैं। उनकी विद्वता और सज्जनता मुझे सम्बन्धी होने से कहीं ज्यादाContinue reading “पलाश, सागौन और मध्यप्रदेश के आदिवासी”

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