कुछ बच्चों के पुराने चित्र


कुल मिला कर लड़कियों की जिंदगी ढर्रे पर चल निकली है। वे घर संभालने लगी हैं। खेतों में कटाई के काम में जाने लगी हैं। लड़के अभी बगड्डा घूम रहे हैं, पर कुछ ही साल बाद मजदूरी, बेलदारी, मिस्त्रियाना काम में लग जायेंगे।

प्री-वेडिंग शूट! तेजी से बदल रहा है समाज


प्री-वेडिंग शूट हमारे लिये बिल्कुल नयी बात थी। लड़का लड़की बिल्कुल फिल्म शूटिंग के अंदाज में विभिन्न सीन में भिन्न भिन्न पोज और पोशाकों में स्क्रीन पर आ रहे थे।

बांस के कारीगरों के समीप


करीब एक दर्जन घर हैं धईकारों के। वे सब बांस के सामान बुनते हैं। रीता पाण्डेय ने एक महिला, बदामा, से बातचीत की। एक उसौनी खरीदी।

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