“यह तो कोरोना है, जिसकी न कोई दवा है न कोई पुख्ता इलाज। बस देख सँभल कर चलना रहना ही हो सकता है। जिस तरह के कामधाम मैं हम हैं वहां अकेले एकांत में तो रहा नहीं जा सकता। लोगों से सम्पर्क तो होगा ही। गतिविधि तो रहेगी ही। बस, बच बचा कर वह कर रहे हैं।”
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नहुष -स्वर्ग से पतित नायक
नहुष में स्वर्ग से पतित होने पर भी मानवीय दर्प बना है। यही दर्प आज भी सफलता से डंसे पर अन्यथा कर्मठ मानवों में दिखता है। यही शायद मानव इतिहास की सफलताओं की पृष्ठभूमि बनाता है।
सीएसआर और गांव में लगी बेंचें
छोटे बदलाव, उनके Nudge Effects बहुत महत्वपूर्ण हैं सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए। आज छह बेंचें लगी हैं। इनकी संख्या बढ़ कर 30 – 40 हो जानी चाहिए।
