मध्यकाल से लोग कलात्मकता को नकारते रहे हैं इस इलाके में


मध्य काल में औरतों को पर्दे में बंद कर इस गांगेय प्रदेश ने जीवन के कला बोध भोथरे कर दिये हैं। आदमी भी वैसे ही हो गए हैं – चिरकुट।

अपने मन को साधना कितना कठिन है!


सूर्यमणि जी ने कहा – “मेरे गुरुजी कहते हैं कि अपने भौतिक जीवन (बैंक) से एकमुश्त निकासी सम्भव नहीं होती। भौतिक बेंक से एक एक रुपया के हिसाब से निकालो और एक एक रुपया आध्यात्मिक अकाउण्ट में जमा करो।” इस धीमी रफ्तार से व्यक्तित्व का रूपांतरण होगा।

पैदल जाते भरत पटेल


अस्सी पार का व्यक्ति, बारह किलोमीटर सामान्य चाल चलने का स्टेमिना और उम्रदराज होने पर भी अपने नाते रिश्तों से मेल मिलाप हेतु यात्रा करने का ज़ज्बा – अपने ननिहाल तक से रिश्ता जीवंत रखना – यह सामान्य बात नहीं है।

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