सूर्यमणि तिवारी, हर्ष मिश्र और नचिकेता


हर्ष को देख कर मुझे लगा कि कठोप्निषद मात्र काव्य कल्पना नहीं। ऐसा पात्र, ऐसा नायक, हो सकता है।

मोहन बरम


यह परिसर – करीब दो बीघे का क्षेत्र – मोहन बरम (मोहन ब्रह्म) का स्थान है। आसपास के दो-तीन सौ किलोमीटर के इलाके के श्रद्धालुओं की प्रेत बाधा दूर करने, मनौती मानने और मनोकामना पूरी होने पर बरम बाबा को धन्यवाद देने आने वालों का स्थान।

दार्शनिक, कारोबारी या बाहुबली #गांवकाचिठ्ठा


उसने उत्तर देने के पहले मुंह से पीक थूंकी। शायद मुंह में सुरती थी या पान। फिर उत्तर दिया – “सोचना क्या है। देख रहे हैं, काम करने वाले आ जाएं, नावें तैयार हो कर उस पार रवाना हो जाएं। आज काम शुरू हो जाए। बस।

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