फर्स्ट डे, फर्स्ट ब्लॉग 2022


बिटिया कल चली गयी अपने घर; बोकारो। दो सप्ताह रही हमारे पास। अपने बेटे और पति से अलग पहले पहल रही होगी इतने दिनों तक। पूरे पखवाड़े अपनी मां से लड़ती रही लाड में।

वैसे नत्तू पाण्डे (अब वह बड़ा हो गया है और विवस्वान पाण्डेय हो गया है।) और विवेक के बिना रहना भी नहीं कहा जायेगा। उसके घर में दो सीसीटीवी कैमरे फिट हैं। उससे लाइव रिपोर्ट देती रही अपने मोबाइल में देख कर। “गजेंदर और रानी काम कम कर रहे हैं, बातें ज्यादा। आज विवेक लगता है किसी काम से जल्दी निकलने वाले हैं। सवेरे नहा कर पूजा के कमरे में जा चुके हैं।… ये खाने में क्या बना रही है? … तूफान आने से मेरे गमले टूट गये हैं।” – यह सब वह सीसीटीवी देख कर बताती रही। बोकारो न रहते हुये भी अपने घर गृहस्थी के कमाण्ड में थी। तकनीक के उपयोग का नया आयाम मैंने देखा।

उसके जाने पर मुझे अच्छा तो नहीं लगा, पर दो सप्ताह रही, इसके कारण मलाल नहीं था। आशा करता हूं कि इसी तरह का चक्कर वह तीन चार महीने में लगाया करेगी। मैंने उसका और उसकी माँ का एक चित्र ब्लॉग हेडर बना लिया है – मानसिक हलचल अभी उनके इर्दगिर्द ही है! :-)

मानसिक हलचल हेडर बनाया। चित्र में झूले पर वाणी और पीछे रीता पाण्डेय

दोपहर में दो बजे के पहले वह यहां से गयी थी और रात सवा आठ बजे अपने घर में थी। मध्यरात्रि के पहले उसने फोन कर उठा दिया – नया साल शुभ कहने के लिये। बुढापे में नींद वैसे ही उथली आती है, ऊपर से मध्यरात्रि को टूट जाये। फिर यह हुआ कि नये साल में ही हम सोये और नये साल में ही जागे।

सवेरे मेरे बेटे ज्ञानेंद्र ने चरण स्पर्श कर नया साल मुबारक कहा। पत्नी जी से भी ग्रीटिंग एक्स्चेंज हुये। फिर बबिता, बहू ने भी पैर छुये।

घर के बाहर निकल कर देखा – गलन की सर्दी के बचाव के लिये बच्चे पत्तियाँ बीन कर अलाव जला रहे थे। सब ने गर्म कपड़े जरूर पहने थे। अच्छे लग रहे थे वे। उन्हें भी नया साल शुभ हो!

घर के बाहर निकल कर देखा – गलन की सर्दी के बचाव के लिये बच्चे पत्तियाँ बीन कर अलाव जला रहे थे। सब ने गर्म कपड़े जरूर पहने थे। अच्छे लग रहे थे वे। उन्हें भी नया साल शुभ हो!

सवेरे का पहला फोन प्रेमसागर का था। वे सूरत से त्र्यम्बकेश्वर की यात्रा पर निकल लिये हैं। नया जूता ले लिया है। स्वामीनारायण मंदिर में दिलीप थानकी जी ने रहने का इंतजाम किया था सूरत में। आगे भी व्यवस्था वही देख रहे हैं। किन्ही तिवारी जी का भी नाम लिया प्रेमसागर ने, जो पुणे में रहते हुये उनका मार्ग गाइड कर रहे हैं। कुल मिला कर एक टीम महादेव ने प्रेमसागर को प्रोवाइड कर दी है। उन्होने अपना लोकेशन मुझसे शेयर किया। ताप्ती नदी के किनारे कोई स्थान था, सूरत में ही। उनके यात्राब्लॉग की तो मैं इति कर चुका हूं। आगे के उनके विवरण – अगर मिलते हैं – तो किस स्वरूप में लिखे जायेंगे, यह अभी तय नहीं किया है।

श्री मोहन का प्रयाग से फोन आया। नये साल की शुभकामनायें एक्स्चेंज करने के लिये। वे मेरे छ साल तक सहकर्मी रहे सुबेदारगंज, प्रयाग में उत्तरमध्य रेलवे के कार्यालय में। बहुत अच्छा लगा उनका फोन आना। आशा है दिन भर इसी प्रकार फोनसम्पर्क होते रहेंगे।

पत्नीजी ने नये साल में सबके नहाने की फिक्र करते हुये गीजर से दो बाल्टी गरम पानी निकाल कर बाथरूम के सभी पीढ़े इस्तेमाल करते हुये सहेज लिया है। मजेदार था वह जुगाड़।

नये साल में बिजली थोड़ा देर तक आयी। कृपा है। गीजर में पानी गर्म हो गया है। पत्नीजी ने नये साल में सबके नहाने की फिक्र करते हुये गीजर से दो बाल्टी गरम पानी निकाल कर बाथरूम के सभी पीढ़े इस्तेमाल करते हुये सहेज लिया है। मजेदार था वह जुगाड़। चूंकि बिजली आ रही है, गीजर में और पानी गर्म होगा, बाकी लोगों के लिये। मैंने जुगाड़ का चित्र लिया – स्नानघर की सभी लाइटों को जला कर। गलन वाली सर्दी में घर में सबको नहला देने का पुनीत संकल्प उनका नव वर्ष का पहला प्रतीक है कि रीता पाण्डेय घर की बिनोवेलेण्ट तानाशाह हैं! :lol:

सन 2022 में रीता पाण्डेय की बिनोवेलेण्ट तानाशाही जिंदाबाद! जय हो!


नया फेज – यू ट्यूब विश्वविद्यालय का विद्यार्थी


मैंने ह्वाट्सएप्प विश्वविद्यालय से डेढ़ दो साल पहले नाम कटा लिया था। या यूं कहूं कि नाम तो नहीं कटाया, पर कक्षायें अटेण्ड करना छोड़ दिया था। मेरे पास यू ट्यूब की भी प्रीमियम मैम्बरशिप थी। पर हर महीने उनके द्वारा पैसा काटना खलने लगा तो वह भी बंद कर दिया था। फिर देखना भी बंद कर दिया। कालांतर में प्रेमसागर कांवरिया के फेर में बहुत टाइम खोटा होने लगा। सिवाय प्रेमसागर ट्रेवल-ब्लॉग लेखन के बाकी सब कुछ होल्ड पर चला गया।

अब प्रेमसागर को नागेश्वर तीर्थ के बाद विराम दे दिया है, तो बाकी सब की ओर ध्यान जा रहा है। मेरी पत्नीजी प्रसन्न हैं – उन्हें लगता है कि मैं दीन दुनियाँ से बेखबर हो गया था। घर के कामकाज में भी ध्यान नहीं दे रहा था। अब वापसी हो गयी है।

और तो और मैंने सोनी वालों का “पुण्यश्लोक अहिल्याबाई” वाला सीरियल भी देखना प्रारम्भ कर दिया। टीवी सीरियल देखना मैं दशकोंं पहले छोड़ चुका था। अब पुनर्मूषको भव की दशा हुई है। मुझे जैसा भी लगे, मेरी पत्नीजी खुश हैं मेरे पुन: मूषक बनने पर!

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यह अहिल्याबाई वाला सीरियल देखने के लिये यू ट्यूब और फिर ओटीटी प्लेटफार्म्स भी खंगाले। यू ट्यूब की प्रीमियम मैम्बरशिप वापस लौट आयी। और यू ट्यूब तरह तरह के वीडियो ठेलने लगा। मैंने देखा कि ह्वाट्सएप्प विश्वविद्यालय की टक्कर में एक यू ट्यूब विश्वविद्यालय भी कम नहीं है। बहुत ज्ञान ठेलता है!

कल यूट्यूब पर नरसिम्हा पीवीआर राव जी से मुलाकात हुई, इंफिनिटी फाउण्डेशन के एक वीडियो पर। वे आईआईटी के उत्पाद हैं और वैदिक ज्योतिषी हैं। अग्नि उपासक हैं। पर्सनालिटी में नये पुराने का जबरदस्त घालमेल है। यूट्यूब विश्वविद्यालय के लिये एक जानदार शानदारश्च विभूति! उनके ट्विटर प्रोफाइल में परिचय है – IITian, engineering manager in US, Vedic astrologer (researcher, author, teacher and maker of a popular free software), Sanskrit scholar, philosopher, Fire Yogi.

नरसिम्हा पीवीआर राव जी ने एक वीडियो में अपने प्रेडिक्शन दिये

उन्होने वीडियो में अपने प्रेडिक्शन दिये –

  • मोदी जी 2024 का चुनाव भी जीतेंगे। मजे से। उसके बाद 2026 तक गद्दी योगी आदित्यनाथ को थमा कर कर्मसन्यास-वैराज्ञ टाइप लेंगे।
  • योगी आदित्यनाथ का राजयोग प्रबल है। अगले डेढ़ दशक – 2036 तक विश्व के लिये उथल पुथल वाले हैं। उसमें वे भारत को वह ऊंचाई दिलायेंगे जो अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पाई थी। उनका स्थान वैसा ही होगा जैसा रुजोवेल्ट का था।
  • चीन ज्यादा फुदकेगा। द्वितीय विश्व युद्ध के समय जैसा जर्मनी का था। पर अंतत: उसके (कम से कम) पांच टुकड़े होंगे।
  • इसी दशक में अमेरिका और ईरान के बीच भीषण युद्ध होगा। … और भी बहुत कुछ!
नरसिम्हा पीवीआर राव जी का ट्विटर हेडर।

इस प्रकार के ज्योतिषीय आकलन, एक आईआईटी वाले से, जो अमरीका में रह रहा है। … सब कुछ ग्लेमराइज करता है। सारे ज्योतिषीगण चमत्कृत करते हैं। मेरे पत्नीजी के ऑफीशियल ज्योतिषी लल्लू मामा (कमलेश कुमार त्रिपाठी जी) भी वैसे ही चमत्कृत करते हैं। वे कट्टर कांग्रेसी हैं और उनके सारे आकलन राहुल राजीव गांधी को अगले दशक का नायक बताते हैं। पर लल्लू मामा का यूट्यूब विश्वविद्यालय में कोई पद नहीं है। सो उनके भक्त हम आसपास के लोगों तक ही हैं। … उन्हें भी यूट्यूब पर अपना ठीया बनाना चाहिये।

गूगल सर्च, यूट्यूब, ह्वाट्सएप्प और ओटीटी – सब मिला कर रिटायर आदमी के लिये समय बहुत क्रीयेटिव तरीके से नष्ट करने के साधन हैं। मैंने यूट्यूब को बतौर विद्यार्थी पुन: ज्वाइन किया है। बहुत से लोगों का सुझाव है कि मुझे भी वहां अपना एक ठीया, एक चैनल बना लेना चाहिये। क्या पता, मैं भी अंतत: वहां विजिटिंग या नियमित फेकल्टी बन सकूं। फिलहाल सीखना है कि सुपरलेटिव्स में, अतिरेक में और सेनशेसनल तरीके से कुछ कैसे कहा-परोसा जाये।


मैं सवेरे उठता कैसे हूं?


मेरे जीवन में कर्मकाण्डों का बहुत महत्व नहीं है। मन उनमें नहीं लगता। कुछ कर्मकाण्ड सामाजिकता निर्वहन के लिये किये जाते हैं। उनका निर्वहन करते हुये निरपेक्ष भाव ही रहता है, सामान्यत:। अन्यथा, ईश्वर मंदिर में या यज्ञ-हवन-भजन में नहीं दिखते। वे अपने को या प्रकृति को यूंही निहारते में ज्यादा पास लगते हैं।

पर एक कर्मकाण्ड मेरे जीवन का अंग बन गया है – तीन चार दशकों से। उसमें कुछ परिवर्तन हुये हैं समय के साथ, पर मूलत: वह वैसा ही रहा है।

सवेरे उठते समय अगर नींद सामान्य रूप से खुलती है – किसी झटके या शोर या आकस्मिक घटना से नहीं – तब निद्रा और जागने की संधि पर मन में लेटे लेटे “हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे” का अठारह बार जप होता है। कभी कभी गिनती में गफलत होने पर अधिक भी हो जाता है पर सामान्यत: अठारह बार ही होता है।

उसके बाद धीरे धीरे बिस्तर पर बैठ कर निम्न प्रार्थना मन में ही होती है –

त्वमादिदेवः पुरुषः पुराणस्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्‌। वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप। वायुर्यमोग्निर्वरुण:शशांक: प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च। नमो नमस्तेस्तु सहस्रकृत्व: पुनश्च भूयोपि नमो नमस्ते॥ पुनश्च भूयोपि नमो नमस्ते॥

Keep sheltered in my arms, they will protect you against everything. Open to my help, it will never fail you.

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥

यह प्रार्थना करते समय मन में योगेश्वर कृष्ण की छवि होती है।

योगेश्वर श्रीकृष्ण

उसके बाद मैं अपने पूर्वजो को याद करता हूं – जोड़े में। अपने माता-पिता, बाबा-आजी, नाना-नानी और स्वसुर-अम्मा जी को। याद करते समय, क्षण भर के लिये ही, उनकी छवि मन में आती है।

उसके बाद धरती पर पैर रख कर झुक कर दोनो हाथों से धरती को प्रणाम करता हूं।

यह क्रम, जैसा मैंने कहा, कई दशकों से चल रहा है। इस कर्मकाण्ड में कुछ परिवर्तन हुये हैं। शुरुआत में केवल हरे राम का जप होता था। कालांतर में गीता के उक्त श्लोक जुड़े। अंग्रेजी में मदर के कहे शब्द तो सन 2000 के आसपास जुड़े और उनके साथ सर्वधर्मान्परित्यज्य वाला श्लोक भी जुड़ा। तब शायद मन उद्विग्न रहा करता था और यह विचार आया कि सब गोविंद पर ही छोड़ देना चाहिये।

अपने पूर्वजों और धरती माता का स्मरण तो लगभग दो साल पहले जुड़ा। तब पिताजी की मृत्यु हुई थी। उसके बाद लगा कि दिन में एक बार उन्हें और पालन करने वाली धरती माता के प्रति भी भाव सवेरे की प्रार्थना में रहने चाहियें।

इस दैनिक कर्मकाण्ड के अलावा कोई धार्मिक कर्मकाण्ड मेरे जीवन का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। स्नान कर पूजा करना भी कभी होता है और कभी नहीं। संस्कृत मुझे नहीं आती – उतनी ही आती है, जितनी स्कूल में तृतीय भाषा के रूप में रटी थी। पर कुछ श्लोक याद हैं। उनका मनमौज के अनुसार यदा-कदा मन में या सस्वर उच्चारण भी कर लेता हूं। … हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे, अच्युतम केशवं रामनारायणम, या कुंदेंदु तुषार हार धवला, आदि कई श्लोक प्रिय हैं। इनको मन में आने पर बोलता हूं।

बस, ले दे कर यही मेरे कर्मकाण्ड हैं। यही मेरा धर्म। … बस। चारधाम की यात्रा, किसी मंदिर देवालय में जाना, किसी धार्मिक समारोह में शरीक होना – यह मेरी सामान्य प्रवृत्ति नहीं है और उनके लिये सयास कर्म नहीं करता। हां, उन्हें जड़ता या उद्दण्डता से नकारता भी नहीं। धर्म बहुत फ्लेग्जिबिल है! :lol:


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