दिलीप चौरसिया का महराजगंज कस्बे का मेडीकल स्टोर


दिलीप का मैडीकल स्टोर महराजगंज कस्बे में सम्भवत: सबसे बड़ा स्टोर होगा। उन्होने बताया कि सन 1964 से है यह दुकान। गंज की सबसे पहली मेडिसिन की दुकान। महराजगंज कस्बे में नेशनल हाईवे 19 के नुक्कड़ पर दो तीन दुकान छोड़ कर। काम की लगभग सभी दवायें वहां मिल जाती हैं।

दुकान पर दिलीप को, उनके छोटे भाई को और यदा कदा उनके पिताजी को बैठा देखता हूं।

अपनी मेडिकल दुकान पर दिलीप चौरसिया
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बाबूलाल विश्वकर्मा का समोसा भजिए का ठेला


एक ठेला और उसपर पड़ा छप्पर. चौबे पुर के पास तिराहे पर. तीन गांव हैं आस पास – चौबेपुर, नारायण पुर और खेघी पूर.

पास में एक ईंट भट्ठा भी है.

कुल मिलाकर बाबूलाल विश्वकर्मा ने समोसा, लौंगलता, भजिया की दुकान का स्टार्टिंग एक ठेला बहुत सही जगह लगाया है. तीनों गांव सम्पन्न हैं. चौबेपुर में बीस तीस रिटायर्ड अध्यापक हैं. खेघीपुर में सम्पन्न सब्जी बोने वाले. सौ मीटर दूर शराब की दुकान भी है – जिसके पियाक भी इस्तेमाल कर सकते हैं इस फेसीलिटी का.

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डीहबड़गांव में छोटी आईस्क्रीम फैक्ट्री


सड़क के किनारे दो कमरे वाली आइस्क्रीम फैक्ट्री में सवेरे सवेरे बहुत गहमागहमी थी. आइस्क्रीम के ठेले – साइकिल ठेले ले कर फेरी वाले निकल रहे थे. फैक्ट्री के कर्मचारी आईस्क्रीम की बार पैक करने में लगे थे.

आईस्क्रीम रखने का फ्रीजर

मोटे तौर पर देखने पर लगता था कि इस दो कमरे के उद्यम से 10फेरी वालों और चार पांच फैक्ट्री कर्मियों को रोजगार मिला हुआ है. लगभग 14-15 लोग 10-12 हजार महीना कमाई कर ले रहे हैं इससे.

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