कैलाश दुबे: कुंये खुदने बंद हुये और सामाजिकता खत्म होने लगी


अब कुंये और तालाब कोई बनवाता नहीं। हैण्डपम्प जो सामुहिक प्रयोग के लिये लगे हैं, वे जिसके घर के पास हैं, वही उनका स्वामी बन बैठा है। पड़ोसी को भी उसका प्रयोग करने नहीं देता।

ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चे


मास्साब सवेरे सात से आठ बजे तक एक घण्टा दे कर तीन हजार रुपया महीना कमाते होंगे। अभिभावक भी डेढ़ सौ महीना दे कर बच्चे को शेक्सपीयर/रामानुजम बनाने की नहीं स्कूल की भरपायी की आशा रखते होंगे।

#200शब्द – कैलाश दुबे


मुझे यह लगा कि यूंही, कैलश जी के पास जाया और बैठा जा सकता है। धर्म और अर्थ को सरलता के मधु में जिस कुशलता से उन्होने साधा है, वह अभूतपूर्व है।

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