पद्मजा पाण्डेय के नये साल के ग्रीटिंग्स


इसमें चीनी पाण्डेय ने बहुत कुछ सीखा। अपने रोज के मिलने वाले, घर में काम करने वालों और आसपड़ोस के बच्चों से जुड़ाव सीखना एक सही बात है! गांव की समझ उससे मजबूत होती है।

सुंदर नाऊ


सिर पर बालों का बोझ सामान्य से ज्यादा होने पर अकल भी कुंद होती है – ऐसा अहसास मुझे होता है। अलबर्ट आइंस्टाइन के बारे में मेरी सोच है कि वे और भी जोरदार वैज्ञानिक होते अगर उनके पास नियमित आने वाला नाऊ होता। भले ही सुंदर की तरह सीधा सादा गंवई नाऊ होता!

रसूल हम्जातोव का त्सादा और यहां का गांव


रसूल हम्जातोव जैसी दृष्टि मेरी क्यों नहीं? अपने गांव को ले कर क्यों मैं छिद्रान्वेशी बनता जा रहा हूं। उसके लोगों, बुनकरों, महिलाओं, मन्दिरों, नीलगायों, नेवलों-मोरों में मुझे कविता क्यों नहीं नजर आती। नदी, ताल और पगडण्डियां क्यों नहीं वह भाव उपजाते?

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free