सीताराम #गांवकेचरित्र #गांवकाचिठ्ठा


नदी में इफरात है मछली की और वह उनका भोज्य नहीं है। सीताराम मुझे अलग प्रकार के प्राणी लगे। बहुत कुछ मेरे अपने जैसे।

यूं ही गुजरे दिन #गांवकाचिठ्ठा


आसपास देखें तो जो दुख, जो समस्यायें, जो जिंदगियां दिखती हैं, उनके सामने कोरोना विषाणु की भयावहता तो पिद्दी सी है। पर जैसा हल्ला है, जैसा माहौल है; उसके अनुसार तो कोरोना से विकराल और कुछ भी नहीं।

स्वैच्छिक लॉकडाउन या अपने पर ओढ़ा एकांतवास #गांवकाचिठ्ठा


पछुआ हवा है। लू बह रही है। वे भविष्यवक्ता जो कह रहे थे कि तापक्रम बढ़ते ही कोरोनावायरस अपने आप खतम हो जायेगा, अपनी खीस निपोर रहे हैं। ज्योतिषी लोग अपने अपने गोलपोस्ट बदल रहे हैं।

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