बरसी का भोज और तिरानबे के पांड़े जी से मुलाकात


मैं बरसी  का कार्यक्रम अटेण्ड करने गया था। अनुराग पाण्डेय बुलाने आये थे। अनुराग से मैं पहले नहीं मिला था। उनके ताऊ जी का देहावसान हुआ था साल भर पहले। आज बरसी  थी। भोज का निमन्त्रण था। मैं सामान्यत: असामाजिक व्यक्ति हूं। मेरी पत्नीजी (गांव में बसने के बाद) काफी समय से कह रही हैंContinue reading “बरसी का भोज और तिरानबे के पांड़े जी से मुलाकात”

मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस


मानिक सेठ की महराजगंज, जिला भदोही में किराने की दुकान है। नोटबन्दी के बाद उनकी पहली दुकान थी, जहां मैने कैशलेस ट्रांजेक्शन का विकल्प पाया। पच्चीस नवम्बर की शाम थी। नोटबन्दी की हाय हाय का पीक समय। वे पेटीएम के जरीये पेमेण्ट लेने को तैयार थे। मैने अपने मोबाइल से पेमेण्ट करना चाहा पर इण्टरनेटContinue reading “मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस”

एक भाग्यशाली (?!) नौजवान से मुलाकात


(यह मैने बतौर फेसबुक नोट पोस्ट किया हुआ है। ब्लॉग पर इसका परिवर्धित रूप रख रहा हूं। दस्तावेज के लिये।) वाराणसी में मैं सोनू (प्रमेन्द्र) उपाध्याय के रथयात्रा स्थित मेडिकल स्टाक-दफ़्तर में बैठा था। सोनू मेरे बड़े साले साहब (देवेन्द्र नाथ दुबे जी) के दामाद हैं। अत्यन्त विनम्र और सहायता को तत्पर सज्जन। वे मेरेContinue reading “एक भाग्यशाली (?!) नौजवान से मुलाकात”

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