अविनाश सिरपुरकर : एक दण्ड-अधिवक्ता के पीछे का व्यक्तित्व


समाचारों में मैं क्रिमिनल लॉयर्स के बारे में बहुत पढ़ता-सुनता रहा हूं। पर पहले किसी क्रिमिनल लॉयर से सम्पर्क नहीं हुआ था। अत: एक कौतूहल तो था मन में कि ये व्यक्ति अपराध, छद्म, और मामलों को सदा एक्यूट एंगल से देखते देखते अपने सामान्य व्यक्तित्व, आदर्श और नैतिकता को किस स्तर का बनाये रखतेContinue reading “अविनाश सिरपुरकर : एक दण्ड-अधिवक्ता के पीछे का व्यक्तित्व”

गांव में शैलेन्द्र दुबे के साथ


शैलेन्द्र का परिवार बनारस में रहता है और वह गांव में।  चार भाइयों में दूसरे नम्बर पर है वह। चार भाई और एक बहन। बहन – रीता पाण्डेय, सबसे बड़ी है और मेरी पत्नी है। मैं रेल सेवा से रिटायर होने के बाद गांव में रहने जा रहा हूं – शैलेन्द्र के डेरा के बगलContinue reading “गांव में शैलेन्द्र दुबे के साथ”

मुर्दहिया


बहुत पहले – बचपन की याद है। गांव सुकुलपुर। एक ओर किनारे पर चमरौटी और पसियान। तीन=चार साल का मैं और वहां से गुजरते हुये अपने से एक बड़े की उंगली थामे। मन में कौतूहल पर बड़े मुझे लगभग घसीटते हुये तेज कदमों से वहां से ले आये। कुछ इस अन्दाज में कि अगर वहांContinue reading “मुर्दहिया”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free