विजय शंकर उपाध्याय


पूछने पर स्वत: बताने लगे वे सज्जन. सब पानी ने चौपट कर दिया. और अभी तक पानी लगा है. जमीन सूखी होती तो आलू, चना, मटर के पौधे बड़े हो रहे होते.

प्रयागराज में सवेरे साइकिल चलाना रुच रहा है


गांव और शहर दोनों के साइकिल भ्रमण के अपने अलग अलग चार्म हैं. मन अब दोनों से आकर्षित होता है.

श्रीराम बिंद की मटर


हमने उन्हें चाय पिलाई। साथ में दो बिस्कुट। वह व्यक्ति जो हमारे लिये सवेरे सवेरे मटर ले कर आ रहा है, उसको चाय पिलाना तो बनता ही है।

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