#रागदरबारी लाइव; गंगा तट पर मछली खरीद के संवाद


मैं जानता हूं कि पूरे दृष्य में गजब की रागदरबारियत थी। पर मैं श्रीलाल शुक्ल नहीं हूं। अत: उस धाराप्रवाह लेखनी के पासंग में भी नहीं आती मेरा यह ब्लॉग पोस्ट।

नदी, मछली, साधक और भगव्द्गीता


अचिरेण – very soon – में कोई टाइम-फ्रेम नहीं है। वह ज्ञान प्राप्ति एक क्षण में भी हो सकती है और उसमें जन्म जन्मांतर भी लग सकते हैं!

राजेश सरोज – जल्दी ही बम्बई लौट जाऊंगा #गांवकाचिठ्ठा


वह लॉक डाउन के पहले ही गांव आया था, उसके बाद लॉक डाउन हो गया और वापस नहीं जा सका। अब मौका लगते ही फिर वापस जाएगा। वहां का काम राजेश को पसंद है।

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