सवेरे तीन बजे उठ जाना


मैंने रेल जीवन या रेल यात्राओं के बारे में बहुत नहीं लिखा। पर वह बहुत शानदार और लम्बा युग था। जब मैंने अपने जूते उतारे तो यह सोचा कि यादों में नहीं जियूंगा। आगे की उड़ान भरूंगा गांव के परिदृष्य में। पर अब, आज सवेरे इकतीस दिसम्बर के दिन लगता है कि फ्लैश-बैक में भी कभी कभी झांक लेना चाहिये।

बाढ़ू का नाम कैसे पड़ा?


बाढ़ू ने बताया कि सन 1948 की बाढ़ में जन्म होने के कारण उनका नाम बाढ़ू पड़ गया और वही नाम चलता चला आ रहा है।

कैंची सीखना #गांवकाचिठ्ठा


भारत बहुत बदला है, पर अभी भी किसी न किसी मायने में जस का तस है। भारत और इण्डिया के बीच की खाई बहुत बढ़ी है। वह कैंची सीखती साइकिल से नहीं नापी जा सकती।

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