उसने मुझे दिखाया था कि साठ रुपये की पुड़िया में दो तीन दिन तक वे तीन चार लोग चिलमानंद मग्न रह सकते थे। वह ‘सात्विक’ आनंद जिसे धर्म की भी स्वीकृति प्राप्त थी। यह सब मैं, अपनी नौकरी के दौरान नहीं देख सकता था।
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आनंदा डेयरी के चंदन ठाकुर
गोपालजी डेयरी (कालांतर में गोपालजी-आनंदा) ने उत्तर भारत/उत्तर प्रदेश में बहुत विस्तार किया। चंदन ठाकुर का कहना है कि इस डेयरी के मुखिया राधेश्याम दीक्षित बहुत डायनमिक व्यक्ति हैं। कम्पनी के दुग्ध उत्पादों की बड़ी रेंज है। आनंदा के व्यवसायिक क्षेत्र विस्तार की भी बहुत योजनायें हैं।
अमूल कोऑपरेटिव का कलेक्शन सेण्टर
लोग मार्जिनल काश्तकार है। इस दशा में दूध का काम बेहतर विकल्प है। लोगों को गेंहू, चावल की मोनो कल्चर से इतर सब्जी लगानी चाहियें, दूध उत्पादन पर जोर देना चाहिये। उसके लिये जरूरी है मार्केट।
