व्यास जी और महाकाव्य सृजन


मार्च’5, 2017: सवेरे की साइकलिंग में हम चले जा रहे थे। राजन भाई और मैं। राजन भाई से मैने कह दिया था कि सड़क-सड़क चलेंगे। पगडण्डी पर साइकल चलाने में शरीर का विशिष्ट भाग चरमरा उठता है। पर राजन जी ने बीच में अचानक पगडण्डी पकड़ ली थी और मैं पीछे चले जा रहा था।Continue reading “व्यास जी और महाकाव्य सृजन”

समय, वर्ग, वर्ण और मैं


गांव में आने पर; उत्तर प्रदेश के सामन्ती अतीत की बदौलत; आसपास जातिगत विभाजन जबरदस्त दिखता है।

ताक्लामाकन का रेगिस्तान,अमेजन और पुस्तक


मैने करीब दो दशक पहले रीडर्स डाइजेस्ट में पुस्तक संक्षेप के रूप में ताक्लामाकन रेगिस्तान की पश्चिम से पूर्व का सबसे दुरुह यात्रा वृतान्त पढा था। मुझे यह भी याद नहीं रहा कि यात्री कौन था – कोई अंगरेज, और पुस्तक किसने लिखी थी। पुस्तक फर्स्ट-पर्सन में लिखी गयी थी; सो बहुत सम्भव है कि यात्रीContinue reading “ताक्लामाकन का रेगिस्तान,अमेजन और पुस्तक”

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