प्रसन्नता की तलाश – गंगा, गांव की सैर


सवेरे अपने वाहन चालक को सात बजे बुला, उसके साथ एक कप चाय पीने के बाद हम दोनों ने घर से निकल कर गांव की छोटी सड़कों पर यूंही घूमने की सोची। करीब एक घण्टा इस प्रकार व्यतीत करने का कार्यक्रम रखा।

अरे वह क्रियेटिव – फन ही नहीं, देने की प्रसन्नता की आदत विकसित करना भी था।


आनंद को केंद्र में रख कर अपनी आदतें ढालने की एक सयास कोशिश की जा रही है। विचार यह है कि हम उसे पैसा खर्च कर, सामान खरीद कर, मार्केटिंग कर या इधर उधर की बतकही/परनिंदा कर नहीं, विशुद्ध प्रसन्नता की आदतें विकसित करने से करेंगे।

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