ठण्ड बढ़ी है। आज कोहरे की दस्तक हुई है।


आज सवा छ बजे घर का गेट खोलने बाहर निकला तो पाया कोहरे की शुरुआत हो गयी है। अब दिनचर्या बदलेगी। सवेरे सात बजे साइकिल ले कर निकलने की बजाय अब नौ या दस बजे निकलना होगा। लेकिन साइकिल चलाते रहो ज्ञानदत्त जी। शारीरिक और मानसिक दोनो फिटनेस का मूल साइकिल में ही है। जिसContinue reading “ठण्ड बढ़ी है। आज कोहरे की दस्तक हुई है।”

रविवार, रामसेवक, अशोक के पौधे और गूंगी


माता-पिता ने उनका नाम रामसेवक रखा तो कुछ सोच कर ही रखा होगा। पौधों की देखभाल के जरीये ही (राम की) सेवा करते हैं वे! उनकी पत्नी को गुजरे दशकों हो गए हैं। बच्चे छोटे थे तो उनको पालने और उन्हें कर्मठता के संस्कार देने में सारा ध्यान लगाया।

अलाव


प्रज्वलित होती आग को निहारते समय अगर आदमी मौन हो कर सोचने की प्रक्रिया में उतरे तो जीवन, उसकी सार्थकता, मरण और मरण के आगे के कई प्रश्न तैरने लगते हैं। उन प्रश्नों और विचारों को सयास पकड़ना और भविष्य के लिये संंजोना एक अभूतपूर्व अनुभव है।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free