राजबली से मुलाकात


राजबली दसवीं आगे नहीं पढ़े। उसके बाद ममहर बाजार में किराने की दुकान खोली। पर उनके बब्बा को यह पसंद नहीं था कि घर से दूर राजबली पुश्तैनी धंधे से अलग काम करें।

दउरी बनाने वालों का बाजार


संक्रांति के अवसर पर हम लाई, चिवड़ा, गुड़ की पट्टी, तिलकुट, रेवड़ी, गुड़ का लेड़ुआ और गजक जैसी चीजें खरीदने के लिये महराजगंज बाजार गये थे। वहां गिर्दबड़गांव की धईकार बस्ती के संतोष दिखे। एक साइकिल पर बांस की दऊरी लटकाये थे।

महराजगंज कस्बे का मोची – जमुना


जमुना जूता-चप्पल की मरम्मत करते हैं। उसके अलावा तल्ले बाहर से मंगवा कर उनपर जूता बनाने का भी काम करते हैं। मैंने उनसे दो तीन जोड़ी चप्पलें ली हैं। काफी मजबूत हैं।

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