पूछने पर स्वत: बताने लगे वे सज्जन. सब पानी ने चौपट कर दिया. और अभी तक पानी लगा है. जमीन सूखी होती तो आलू, चना, मटर के पौधे बड़े हो रहे होते.
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कठिन है जीवन, पिछली बरसात के बाद
जहां महुआरी थी, वहां अब झील बन गयी है। वह पानी कहीं निकल नहीं सकता। गांव वालों में न तो सामुहिक काम कर जल का प्रवाह बनाने की इच्छा है और न साधन। सरकार का मुंह देख रहे हैं…
प्रयागराज में सवेरे साइकिल चलाना रुच रहा है
गांव और शहर दोनों के साइकिल भ्रमण के अपने अलग अलग चार्म हैं. मन अब दोनों से आकर्षित होता है.
