बिस्राम का बुढ़ापा


वह लाठी टेकते आया था और खड़ंजे के अंत पर खड़ा था। एक टीशर्ट पहने जिसपर तिरंगा बना था और नीले रंग में अशोक चक्र भी। उसकी टी शर्ट और उम्र देख कर मैं रुक गया। बुढ़ापे से टीशर्ट मैच नहीं कर रही थी। मैंने कहा – “टीशर्ट बहुत अच्छी है। कहां से लिया?” उसकेContinue reading “बिस्राम का बुढ़ापा”

सुनील ओझा जी और गाय पर निर्भर गांव का जीवन


इस इलाके की देसी गौ आर्धारित अर्थव्यवस्था पर ओझा जी की दृढ़ सोच पर अपनी आशंकाओं के बावजूद मुझे लगा कि उनकी बात में एक कंविक्शन है, जो कोरा आदर्शवाद नहीं हो सकता। उनकी क्षमता भी ऐसी लगती है कि वे गायपालन के मॉडल पर प्रयोग कर सकें और उसके सफल होने के बाद उसे भारत के अन्य भागों में रिप्लीकेट करा सकें।

गौ-गंगा-गौरीशंकर के सतीश सिंह भारत देख चुके साइकिल से!


बताया गया कि सुनील ओझा जी हैं जो इस प्रॉजेक्ट के काम धाम नियन्ता हैं। वे गुजराती सज्जन हैं। गौ-गंगा-गौरीशंकर की इस विशाल प्रॉजेक्ट की परिकल्पना उनकी है या प्रधानमंत्री जी की; यह मुझे नहीं मालुम। पर वृहत स्तर पर वाराणसी और प्रयाग के बीच कुछ बनने जा रहा है।

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