डा. तपन मंडल के साथ – डाइट की प्लानिंग



डा. तपन मंडल सूर्या ट्रॉमा सेंटर के फिजीशियन हैं। पहले समय समय पर आते थे, अब वे (लगभग) पूर्णकालिक आधार पर हैं। भर्ती होने वाले अधिकांश मरीज उन्हीं के इलाज के अंतर्गत होते हैं।

मैं भी पिछले शुक्रवार 15 नवंबर से उनका मरीज था। मुझे पेशाब में संक्रमण था – इस स्तर का कि मुंह से ली जाने वाली (oral medicines) दवाओं के बस का नहीं। इंट्रा वेनस दवाओं का कोर्स जरूरी था।

साथ ही मैं मधुमेह ग्रस्त भी हूँ। अतः जरूरी था कि मधुमेह के प्रबंधन पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए।

डा. तपन मंडल
Continue reading “डा. तपन मंडल के साथ – डाइट की प्लानिंग”

विजय शंकर उपाध्याय



वह सड़क के किनारे के अपने खेत में चल रहा था. खेत में जुताई हो चुकी थी. शायद आलू बोने की तैयारी थी. उसने मुझे आसपास के दृष्य के चित्र लेते पाया और शायद कौतूहल वश दूर से ही बोला – खेती की दुर्दशा देख रहे हैं?

अपने खेत में विजय शंकर उपाध्याय

मेरे पूछने पर स्वत: बताने लगे वे सज्जन. सब पानी ने चौपट कर दिया. और अभी तक पानी लगा है. जमीन सूखी होती तो आलू, चना, मटर के पौधे बड़े हो रहे होते. पर इस बार तो बुआई भी नहीं हो पायी है. चना की फसल तो लगता है इस बार होगी ही नहीं. तब तक तो गेंहू की फसल का समय आ जाएगा.

Continue reading “विजय शंकर उपाध्याय”

कठिन है जीवन, पिछली बरसात के बाद



सामने उडद की फ़सल का ढेर लगा है। एक जोड़ी बैल ले कर अधियरा और उसकी पत्नी उडद की दंवाई कर रहे हैं। गोल गोल घूमते बैल अच्छे लगते हैं। यह दृष्य सामान्यत: आजकल दिखता नहीं गांव में। बैल खेती के परिदृष्य से अलग किए जा चुके हैं।

उड़द की दंवाई करते बैल

मुझे अन्दाज नहीं है कि उडद की फसल की गुणवत्ता या मात्रा अच्छी है या नहीं। अन्दाज से कहता हूं – उडद तो ठीक ठाक हो गयी है।

Continue reading “कठिन है जीवन, पिछली बरसात के बाद”
Design a site like this with WordPress.com
Get started