उठो; चलो भाई!


यह एक पुरानी पोस्ट है – बारह जनवरी 2013 की। मैं अस्पताल में भर्ती था। शरीर इण्ट्रावेनस इंजेक्शनों से एण्टीबायोटिक अनवरत भरने की प्रक्रिया से छलनी था। पर उस समय भी मन यात्रा की सोच रहा था।

गंगा किनारा और बालू लदान के मजदूर


काम मेहनत का है। सो 3-4सौ (गांव का रेट) न कम है न ज्यादा। जो गांव में रहना चाहते हैं, वे इसको पसंद करेंगे; वर्ना अवसर देख कर महानगर का रुख करेंगे। मजदूर गांव/महानगर के बीच फ्लिप-फ्लॉप करते रहते हैं।

संकल्पों की कसौटी पर जीवन कसते प्रेमसागर


प्रेम सागर बताते हैं कि जब यह 101 कांवर संकल्प लिया और देवघर के बैजनाथधाम में जल चढ़ाना प्रारम्भ किया तो आशातीत दैवीय परिवर्तन हुआ। बिटिया की शादी सहजता से हो गयी। संकल्प की कसौटी पर खरे उतरे प्रेम सागर!

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