युगांत – इरावती कर्वे – पुस्तक पर पॉडकास्टिकी


युगांत – एक युग का अंत; पुस्तक इतनी रोचक है कि हम पॉडकास्ट में नौसिखिये होने के बावजूद इस पुस्तक पर परिचयात्मक चर्चा से अपने को रोक नहीं पाये।

सूर्यमणि तिवारी – अकेलेपन पर विचार


फोन पर ही सूर्यमणि जी ने कहा था कि बहुत अकेलापन महसूस होता है। यह भी मुझे समझ नहीं आता था। अरबपति व्यक्ति, जो अपने एम्पायर के शीर्ष पर हो, जिसे कर्मचारी, व्यवसाय, समाज और कुटुम्ब के लोग घेरे रहते हों, वह अकेलापन कैसे महसूस कर सकता है?

इस जगत के सुख दुख यहीं भोगने हैं


“यह नहीं हो सकता। इस जगत के जो सुख दुख हैं, वे हमें भोगने ही हैं। निर्लिप्त भाव से उन्हें इसी जगत में ही भोग कर खत्म कर दिया जाये, यही उत्तम है। अन्यथा वे अगले जन्म में आपका पीछा करेंगे। उन्हें आपको भोगना तो है ही।”

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