गांव में रिहायश – घर के परिसर की यात्रा : रीता पाण्डेय


घर में अपने पति समेत बहुत से बच्चों को पालती हूं मैं। ये पेड़-पौधे-गमले मेरे बच्चे सरीखे ही हैं। ये सब मिलकर इस घर को एक आश्रम का सा दृष्य प्रदान करते हैं। बस, हम अपनी सोच ऋषियों की तरह बना लें तो यहीं स्वर्ग है!

कठिन है जीवन, पिछली बरसात के बाद


जहां महुआरी थी, वहां अब झील बन गयी है। वह पानी कहीं निकल नहीं सकता। गांव वालों में न तो सामुहिक काम कर जल का प्रवाह बनाने की इच्छा है और न साधन। सरकार का मुंह देख रहे हैं…

सूर्य मणि तिवारी जी का सूर्या ट्रॉमा सेंटर और अस्पताल – एक अवलोकन


अस्पताल से कमाना तो सूर्य मणि जी का मोटिव हो ही नहीं सकता. पूर्वांचल के इस इलाके में लोगों की वैसी पे करने की केपेसिटी ही नहीं है.

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