नजीर मियाँ की खिचड़ी – रीपोस्ट


नजीर मियां का पूरा परिवार आम की रखवाली में लगा रहता था। जब आम का सीजन नहीं होता था तब वह साड़ियां बुनता था। औरतें धागे रंगती, सुखाती और चरखी पर चढ़ाती थीं। फिर आदमी लोग उसे करघे पर चढ़ा कर ताना-बाना तैयार करते।

मचिये के लिये मिला राजबली विश्वकर्मा से


राजबली का परिवार अलाव जला कर कोहरे में गर्माहट तलाशता बैठा था। आकर्षक मूछों वाले राजबली एक मोटे लकड़ी के टुकड़े को बसुले से छील भट्ठा पर काम करने वालों के लिये खड़ाऊँ बना रहे थे।

मोहनलाल, सूप वाला


गजब के आदमी मिले सवेरे सवेरे मोहनलाल। आशा और आत्मविश्वास से परिपूर्ण। कर्मठता और जिन्दगी के प्रति सकारात्मक नजरिये से युक्त। इस इलाके के निठल्ले नौजवानों के लिये एक मिसाल।

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